
'सरकारी नौकरी का चुनाव करना ही केवल आपके भविष्य को सुरक्षित रखने में मदद करेगा'; सेवानिवृत्ति के पश्चात् भी सरकारी नौकरियों द्वारा प्रदान लाभों अर्थात् 'पेंशन' के कारण, अधिकांश भारतीयों में यह सबसे आम मिथक है । पेंशन या सेवानिवृत्ति योजनाएं वृद्धावस्था के दौरान, जब लोगों के पास आमदनी का नियमित स्रोत नहीं होता वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करती है । यह बचत के निवेशित और संचित करने का अवसर प्रदान करती है और इससे व्यक्ति सेवानिवृत्ति पर वार्षिकी योजना के माध्यम से एकमुश्त राशि और / या नियमित आय प्राप्त करता है। यह सुनिश्चित करती हैं कि लोग सम्मान के साथ और वृद्धापेवस्था के दौरान अपने जीवन स्तर पर किसी भी प्रकार का समझौता किए बिना रहें। इसके अलावा, सर्वेक्षणों से पता चलता है कि अधिकतर निजी क्षेत्र के कर्मचारी उनके लिए उपलब्ध पेंशन योजनाओं के विषय में अनभिज्ञ हैं। भारत में बढ़ रही है आत्मनिर्भरता वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, वृद्ध जनसंख्या (60 वर्ष की आयु और उससे अधिक आयु के व्यक्ति) 104 मिलियन पाई गई जो 2011 में कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत था I परिणामस्वरुप, वृद्धावस्था निर्भरता अनुपात जो भारत में कामकाजी आबादी पर वृद्धों की निर्भरता को इंगित करता है 1991 में 12.2 प्रतिशत से बढ़कर 2001 में 13.1 प्रतिशत हो गया और 2011 में यह 14.2 प्रतिशत हो गया। गिरते जन्म और मृत्यु दर के साथ प्रति व्यक्ति आय में बेहतर वृद्धि, बेहतर जीवन स्थिति और बेहतर चिकित्सा सेवाओं के कारण जीवन प्रत्याशा धीरे-धीरे बढ़ रही है। परिणामस्वरुप, वृद्ध आबादी का भाग और आकार दोनों समय के साथ बढ़ रहा है। वृद्ध आबादी का अनुपात 2011 में आबादी के 8.6% से 2050 तक 20% तक बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, भारत में निर्भरता अनुपात विकसित देशों जैसे, अमेरिका, यूरोप और जापान की तुलना में बहुत कम है, किन्तु अब यह तेजी से बढ़ रहा है । इस सांख्यिकीय आंकड़े को देखकर, पेंशन के लिए बचत के महत्व को समझना महत्वपूर्ण है, जिससे लोग अपनी वृद्धावस्था में आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहें ।
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