
नौकरीपेशा लोगों को जैसे ही सैलरी मिलती है, वे सबसे पहले महीने के खर्चे गिनते हैं। इन खर्चों के पूरा होने पर अगर कुछ बच जाता है तो फिर उसे भविष्य के लिए सेविंग्स में लगाने के बारे में सोचा जाता है। लेकिन अक्सर होता है कि हर तरह से कोशिश करने के बावजूद सैलरी महीने का आखिर आते-आते खत्म हो जाती है और सेविंग्स के लिए कुछ नहीं बचता। इसकी वजह है सैलरी-खर्च और सेविंग्स के बीच सही तरीके से मैनेज न कर पाना। हममें से ज्यादातर लोगों की आदत खर्चों को पहले और सेविंग्स को बाद में रखने की है, जबकि फाइनेंशियल प्लानर्स के मुताबिक अगर आप वाकई में फ्यूचर के लिए सिक्योरिटी चाहते हैं तो पहले सेविंग्स और बाद में खर्चों को रखें। एडवांटेज फाइनेंशियल प्लानर्स LLP में पार्टनर और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर तारेश भाटिया सैलरी के मैनेजमेंट के लिए 5 प्वॉइंट्स का ध्यान रखने की सलाह देते हैं, आइए आपको बताते हैं क्या हैं वे प्वॉइंट्स-
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